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Wednesday, 16 April 2014

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-4


अगर रुक जाये मेरी धड़कन तो मौत न समझना ,.,
कई बार ऐसा हुआ है तुझे याद करते करते ,.,!!!

Agar ruk jaye meri dhadkan to maut na samjhana
Kai bar aisa hua hai tujhe yaad karte karte

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जहाँ दरिया कहीं अपने किनारे छोड़ देता है .,.
कोई उठता है और तूफां का रुख मोड़ देता है .,.,!!

Jahan dariya kahi apne kinare chhod deta hai
Koi uthta hai aur toofan ka rukh mod deta hai

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मत पूछ मेरे सब्र की इन्तेहा कहाँ तक है .,.
तू सितम कर ले तेरी हसरत जहाँ तक है .,.
वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी ,उन्हें होगी .,.,
हमें तो देखना के तू बेवफा कहाँ तक है .,.!!!

Mat poochh mere sabra ki inteha kahan tak hai
Tu sitam kar le teri hasrat jahan tak hai
Wafa ki ummeed jinhe hogi unhe hogi
Mujhe to dekhna hai tu bewafa kahan tak hai

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दुःख देकर सवाल करते हो ,.
तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो .,
देख कर पूछ लिया हाल मेरा .,
चलो कुछ तो ख्याल करते हो .,.
शहर -ए -दिल में ये उदासियाँ कैसी .,
ये भी मुझसे सवाल करते हो .,.
अब किस किस की मिसाल दूँ तुमको .,
हर सितम बेमिसाल करते हो .,.,!!!

Dukh dekar sawal karte ho
Tum bhi ghalib kamal karte ho
Dekh kar poochh liya haal mera
Chalo kuchh to khayal karte ho
Shehar-e-dil me ye udasiyan kaisi
Ye bhi mujhse sawal karte ho
Ab kis kis ki misaal dun tumko
Har sitam bemisaal karte ho



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याद न दिलाओ वादा उसका ,.,
शर्मिंदा हूँ मैं खुद ऐतबार करके ,.,!!!

Yaad na dilao wada uska
Sharminda hu mai khud aitbar karke
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मुझको थकने नही देता जरूरतों का पहाड़ ,.,
मेरे बच्चे मुझे बूढा होने नहीं देते ,.,!!!

Mujhko thakne nahi deta jaruraton ka pahad
Mere bachhe mujhe budha hone nahi dete

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इस शहर के क़ातिल को देखा तो नहीं मैंने मगर ,.,
लाशों से अंदाज़ा है के क़ातिल पर जवानी थी ,.,!!

Is shehar ke kaatil ko dekha to nahi maine magar
Lashon se andaja hai ke katil par jawani thi

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हुस्न का क्या काम सच्ची मोहब्बत में ,.,,
जब आँख मजनू हो तो लैला हसीन ही लगती है ,.,!!

Hushn ka kya kaam sachhi mohabbat me
Jab aankh majnu ho to laila haseen hi lagti hai

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रुको मैं दिल दिखाता हूँ ,, ये नब्ज क्या खाक बोले गी ,.,
मरीज -ए -इश्क़ हूँ ग़ालिब ,, दवा दूर ही रखो ,.,!!




Ruko mai dil dikhata hu,, ye nabj kya khak bole gi
Mareej-e-ishq hu sahab , dawa door hi rakho

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पानी सस्ता है तो फिर इसका तहफ़्फ़ुज़ कैसा ??
खून महंगा है तो हर शहर में बहता क्यों है ??

Paani sasta hai to fir iska tahffuz kaisa ??
Khoon mehnga to har shehar me bahta kyu hai?
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आया तो घर तलक था वो, लेकिन पता नहीँ...
दस्तक के बाद क्या हुआ, मिल कर न गया...

Aaya to ghar talak tha wo, lekin pata nahin
Dastak ke baad kya hua , mil kar na gaya

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इसी लिए तो बच्चों पे नूर सा बरसता है,
शरारतें करते हैं, साजिशें तो नहीं करते....!!!!

Isiliye to bachhon pe noor sa barsata hai
Shararaten karte hain, saazishen to nahin karte

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जो तुम बोलो बिखर जाएँ जो तुम चाहो संवर जायें,
मगर यूँ टूटना जुड़ना बहुत तकलीफ देता है..

Jo tum bolo bikhar jaayen , jo tum chaho sanwar jaaye
Magar yun tootana judna bahut takleef deta hai

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ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा,
वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता,.,.!!

Na shakhon ne jagah di na hawaon ne bakhsha
Wo patta aawara na banta to kya karta

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ये तो शौक है मेरा दर्द लफ़्ज़ों में बया करनेका,
नादान लोग हमे यूँ ही शायर समझ लेते हैं...!!!

Ye to shauk hai mera dard men bayan karne ka
Naadan log hame yun hi shayar samajh lete hai

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ना होना बेमुरव्वत ,ना दिखाना बेरुखी ,.,
बस सादगी से कहना के "बोझ बन गये हो तुम ",.,!!!

Na hona bemurawwat, na dikhana berukhi
Bas saadgi se kahna ke bojh ban gaye ho tum

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सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब....
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |

Sukoon ki baat mat kar ae ghaalib
Bachpan wala itwaar ab nahi aata

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ना -उम्मीदी का मैं क़ायल तो नहीं हूँ मगर ,.,
मैंने बरसात में जलते हुए घर देखे हैं ,.,!!

Na-ummeedi ka mai kayal to nahi hun magar
Maine barsaat me jalte huye ghar dekhe hain

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सूरज के साथ रह के मैं भूला नहीं आदाब,.,
जुगनू का साथ पके वो मग़रूर हो गया ,.,!!!

Sooraj ke saath rah ke main bhoola aadab
Jugnu ka saath paake wo magroor ho gaya

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ज़ख़्म देकर न पूछ दर्द की शिद्दत क्या है ,.,
दर्द तो दर्द है ,थोडा क्या ज्यादा क्या ,.,??

Jakhm dekar na poochh dard ki shiddat kya hai
Dard to dard , thoda kya jyada kya ??

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कितना अजीब है उनका ये अंदाज़-ए मोहब्बत भी...
रोज़ रुला कर कहते है "अपना खयाल रखना ...!!

Kitna ajeeb hai unka ye andaaj-e-mohabbat bhi
Roj rula kar kahte hain, apna khayal rakhna

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यही सोचते सोचते हम एक दूसरे को खो देंगे एक दिन ,.,
वो मुझे याद नही करता , मैं उसे याद नही करता ,.,!!!

Yahi sochte sochte ham ek doosre ko kho denge ek din
Wo mujhe yaad nahi karta, mai use yaad nahi karta

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खोने के दर से क्यों जीते हो ज़ाहिद ,.,
तुम हमें याद करो ,हम तुम्हें याद करे ,.,!!

Khone ke dar se kyon jeete ho zaahid
Tum hamen yaad karo, ham tumhe yaad kare

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वो परिंदा जिसे अपनी परवाज़ से फुर्सत न थी फ़राज़ ,.,
आज तनहा हुआ तो मेरी दीवार पे आ बैठा ,.,!!

Wo parinda jise apni parwaaj se fursat na thi 'faraj'
Aaj tanha hua to meri deewar pe aa baitha

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मेरी ज़िन्दगी का खेल शतरंज से भी मज़ेदार निकला ,.,
मैं हारा भी तो अपनी रानी से ,.,!!

Meri jindagi ka khel shatranj se bhi majedaar nikla
Main haara bhi to apni raani se

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लफ़्ज़ों के हेर फेर का धंधा भी खूब है ,.,
जाहिल भी हमारे शहर में उस्ताद हो गये ,.,!!

Lafjon ke her fer ka dhandha bhi khoob hai
Jaahil bhi hamare shehar me ustaad ho gaye

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प्यास कहती है के अब रेत निचोड़ी जाये ,.,
अपने हिस्से में समंदर नहीं आने वाला ,.,!!!

Pyaas kahti hai ke ab ret nichodi jaaye
Apne hisse me samandar nahi aane wala

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सुनो जिसका डर था वोही हो गया ,.,
मोहब्बत हो गयी है तुमसे ,.,!!

Suno jiska dar tha wohi ho gaya
Mohabbat ho gayi hai tumse

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दिल तो मेरा उदास है नासिर ,.,
फिर ये शहर क्यों सायं सायं करता है ,.,!!

Dil to mera udaas hai naasir
Fir ye shehar kyo saany saany karta hai

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तुम्हे मुफ्त में जो मिल गए हम,
तुम कद्र ना करो ये तुम्हारा हक बनता है...!!

Tumhe muft me jo mil gaye ham
Tum kadra na karo ye tumhare haq banta hai

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ताबीब अपनी दवा पे नाज़ करता है ऐ लोगो ,.,
मगर मुझे आराम आता है किसी का नाम लेने से ,.,!!

Tabeeb apni dawa pe naaj karta hai ae logo
Magar mujhe aaram aata hai kisi ka nam lene se

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भूल जाना तो रश्म -ए -दुनिया है फ़राज़ ,.,
तुमने भूल कर कौन सा कमाल कर दिया ,.,.,!!!

Bhool jaana to rashm-e-duniya hai faraj
Tumne bhool kar kaun sa kamaal kar diya

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आज फिर वो निकले हैं बेनक़ाब शहर में ,.,
आज फिर हुज़ूम होगा कफ़न की दुकान पर ,.,!!

Aaj fir wo nikle hain , benakab shehar me
Aaj fir hujoom hoga kafan ki dukaan par

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बर्बाद बस्ती में किसको ढूंढ़ते हो मोहसिन। .,
उजड़े हुए लोगों के ठिकाने नहीं होते ,.,!!!

Barbaad basti me kisko dhundhte ho mohasin
Ujde huye logo ke thikaane nahi hote

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कोशिश जितना भी सुलझाने का करता हु, खुद उतना ही उलझ जाता हु,
क़ंबक्‍त! ये इश्क़ तो मुझे " मसला-ऐ-कश्मीर " लगता है..!!!

Koshish jitna bhi suljhane ka karta hu , khud utna hi ulajh jata hu
Kambakht ! ye ishq bhi mujhe masla-e-kashmir lagta hai

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वोही वहसत , वोही हैरत ,वोही तन्हाई है मोहसिन ,.,
तेरी आँखें मेरे ख्वाबों से कितनी मिलती -जुलती हैं। ,.,

Wohi vahsat, wohi hairat , wohi tanhai hai mohasin
Teri aankhe mere khwabon se kitni milti julti hai

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सायद तू प्यासा कभी मेरी तरफ लौट आये 'फ़राज़ '…
आांखो में लिए फिरता हूँ दरिया तेरी खातिर ,.,!!

Saayad tu pyasa kabhi meri taraf laut aaye faraz
Aankhon me liye firta hu dariya teri khatir

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ये थी मौत ,जो बिछड़ के हमने देखी है ,., फ़राज़
जिंदगी तो वोही थी जो तेरी महफ़िल में गुजर गयी ,.,.!!!

Ye this maut jo bichhad ke hamne dekhi hai faraz
Jindagi to wohi thi jo teri mehfil me gujar gayi

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फिर कहाँ का हिसाब रहता है ,.,
इश्क़ जब बेहिसाब हो जाये ,.,!!

Fir kahan ka hisab rahta hai
Ishq jab behisab ho jaye

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अपनी यादों से कह दो के एक दिन की छुट्टी दें ,.,
इश्क़ के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए ,.,!!!

Apni yadon se kah do ke ek din ki chhutti de
Ishq ke hisse me bhi itwar hona chahiye

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हमारे दिल को कोई मांगने भी न आया ,.,
किसी गरीब की बेटी का हाथ हो जैसे ,.,!!

Hamare dil ko koi mangne bhi na aaya
Kisi gareeb ki beti ha haath ho jaise

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मैंने भी बदल दिए हैं उसूल -ए -ज़िन्दगी ,.,
अब जो याद करे गा ,सिर्फ वो ही याद रहेगा .,.!!!

Maine bhi badal diye hain usool-e-jindagi
Ab jo yaad kare ga, sirf wo hi yaad rahe ga

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दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है मुझे ,.,
जैसे जैसे दोस्तों को आज़माता जा रहा हूँ मैं ,.,!!

Dushmano se mohabbat hone lagi hai mujhe
Jaise jaise doston ko aajmata ja raha hu main

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एक अगर तुझको चुरा लूँ मैं ,.,
सारा आलम ही गरीब हो जाये .,.!!

Ek agar tujhko chura lun main
Sara aalam hi gareeb ho jaye

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