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Sunday, 18 May 2014

Mehfil- Faraz (Ahmad Faraz) ke sher (Great Collection)




कौन परेशान होता है तेरे ग़म से 'फ़राज़',.,
वो अपनी ही किसी बात पे रोया होगा ,.,!!!

Kaun pareshan hota hai tere gam se 'faraz'
Vo apni hi kisi baat pe roya hoga

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किसी बेवफा की खातिर ये जूनून फ़राज़ कब तक ,.,
जो तुम्हे भुला चुका ,उसे तुम भी भूल जाओ ,.,!!

Kisi bewafa ki khatir junoon faraz kab tak
Jo tumhe bhula chuka , use tum bhi bhool jao

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वो परिंदा जिसे अपनी परवाज़ से फुर्सत न थी फ़राज़ ,.,
आज तनहा हुआ तो मेरी दीवार पे आ बैठा ,.,!!

Wo parinda jise apni parwaaj se fursat na thi 'faraz'
Aaj tanha hua to meri deewar pe aa baitha

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भूल जाना तो रश्म -ए -दुनिया है फ़राज़ ,.,
तुमने भूल कर कौन सा कमाल कर दिया ,.,.,!!!

Bhool jana to rashm-e-duniya hai faraz
Tumne bhool kar kaun sa kamaal kar diya

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सायद तू प्यासा कभी मेरी तरफ लौट आये 'फ़राज़ '…
आांखो में लिए फिरता हूँ दरिया तेरी खातिर ,.,!!!

Sayad tu pyasa kabhi meri taraf laut aaye faraz
Aankhon me liye firta hu dariya teri khatir




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ये थी मौत ,जो बिछड़ के हमने देखी है ,., फ़राज़
जिंदगी तो वोही थी जो तेरी महफ़िल में गुजर गयी ,.,.!!!

Ye thi maut , jo bichhad ke hamne dekhi hai 'faraz'
Jindagi to wohi thi jo teri mehfil me gujar gayi

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हर एक दुसरे का ऐब इस तरह निकालता है फ़राज़ ,.,
जैसे वो खुद अपनी जात में फरिस्ता हो कोई ,.,!!

Har ek dusre me aib is tarah nikalta hai faraz
Jaise wo khud apni jaat me farista ho koi

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वो जिसके पास रहता था दोस्तों का हुजूम ,.,
सुना है फ़राज़ कल रात एहसास -ए -तन्हाई से मर गया ,.,!!!

Wo jiske paas rahta tha doston ka hujoom
Suna hai faraz kal raat ehsaas-e-tanhai se mar gaya




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विदा -ए -यार का मंज़र कुछ याद नहीं फ़राज़ ,.,
बस इक डूबता सूरज नज़र में रहा ,.,!!

Vida-e-yaar ka manjar kuchh yaad nahi faraz
Bas ek doobta sooraj najar me raha

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मैंने मांगी थी उजाले की फ़क़त एक किरन 'फ़राज़',.,
तुमसे ये किसने कहा के आग लगा दी जाये ,.,!!    

Maine mangi thi ujaale ki fakat ek kiran faraz
Tumse ye kisne kaha ke aag laga di jaaye

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अजीब अँधेरा है फ़राज़ तेरी महफ़िल में ,.,
किसी ने दिल भी जलाया तो रोशनी न हुई ,.,!!

Ajeeb andhera hai faraj teri mehfil me
Kisi ne dil bhi jalaya to raushani na hui

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समंदर में फ़ना होना तो किस्मत की कहानी है फ़राज़ ,.,
जो मरता है किनारों पे ,मुझे दुःख उनपे होता है ,.,!!

Samandar me fana hona to kismat ki kahani hai faraz
Jo marta hai kinaaron pe mujhe dukh unpe hota hai

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बड़ा नाज़ था उनको अपने परदे पे फ़राज़ ,.,
कल रात वो ख्वाब में सर -ए -आम चले आये ,.,!!

Bada naaj tha unko apne parde pe faraz
Kal raat wo khwab me sar-e-aam chale aaye

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शिद्दत -ए -दर्द से शर्मिंदा नहीं मेरी वफ़ा 'फ़राज़ ',.,
दोस्त गहरे हों तो फिर जख्म भी गहरे होंगे ,.,!!!

Shiddat -e- dard se sharminda nahi meri wafa faraz
Dost gahre ho to fir jakhm bhi gahre honge

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