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Sunday, 24 August 2014

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-8

महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी,
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा..

Mahboob ka ghar ho ya fariston ki jameen
Jo chhod diya fir use mud kar nahi dekha

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इश्क करो तो आयुर्वेदिक वाला करो
फायदा ना हो तो नुक़सान भी ना हो--!!

Ishq karo to ayurvedic wala karo
Fayda na ho to nuksaan bhi na ho

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बिखरने दो होंठों पे हँसी की फुहारों को,
प्यार से बात कर लेने से दौलत कम
नहीं होती..!!!

Bikharne do hontho pe hansi fuharon ko
Pyaar se baat kar lene se daulat kam nahi hoti

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शिद्दत -ए -दर्द से शर्मिंदा नहीं मेरी वफ़ा 'फ़राज़ ',.,
दोस्त गहरे हों तो फिर जख्म भी गहरे होंगे ,.,!!!

Shiddat -e-dard se sharminda nahi meri wafa faraz
Dost gahre ho to fir jakhm bhi gahre honge

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गीली लकड़ी सा इश्क तुमने सुलगाया है, .
. ना पूरा जल पाया कभी, न बुझ पाया है..,.,!!!

Geeli lakdi sa ishq tumne sulgaya hai
Na pura jal paaya kabhi na bhujh paaya hai

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मेरी गजलों में ढल गया, चाँद कितना बदल गया होगा,
रास्तों को वो जनता कब था, पाँव ही था फिसल गया होगा,.,!!

Meri ghajalo me dhal gaya , chand kitana badal gaya hoga
Raston ko wo jaanta kab tha, paano hi tha fisal gaya hoga

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यह संगदिल लोगों की दुनिया है... ज़रा संभलकर चलना मेरे दोस्त...!
यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है..... नज़रों से गिराने के लिए.....!!

Ye sangdil logo ki duniya hai, jara sambhal kar chalna mere dost
Yahan palkon pe bithaya jaata hai, najaron se giraane ke liye

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वो नदी थी वापस मुड़ी नहीं ,.,
मैं समंदर था आगे बढ़ा नहीं ,.,!!

Wo nadi thi vapas mudi nahi
Main samandar tha aage badha nahin



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ज़नाज़ा इसलिए भारी था उस गरीब का ,.,
वो अपने साथ सारे अरमान साथ लेकर गया था ,.,!!

Janaja isliye bhari tha us gareeb ka
Wo apne saath saare armaan saath lekar gaya tha

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एक तो हुस्न बला ,उसपे बनावट तौबा ,.,
घर बिगाड़ें गे हज़ारों के ,ये संवरने वाले ,.,!!!

Ek to hushn bala , uspe banawat tauba
Ghar bigaden ge , hajaron ke , ye sanwarne wale

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ज़रा सी आहट से....वो जग जाता है रातों में..
.खुदा बेटी दे गरीब को....तो दरवाज़ा भी दे.,.,!!!

Jara si aahat se , wo jag jata hai raaton
Khuda beti de gareeb ko , to darwaja bhi de

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उम्र भर साँप से शर्मिन्दा रहे ये सुन कर,.,
जबसे इन्सान को काटा है तो फन दुखता है,.,!!!

Umra bhar saanp se sharminda rahe ye sun kar
Jabse insan ko kata hai to fan dukhta hai

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अच्छे लोगों को सब चाहा करते हैं ,.,
है कोई तलबगार बहोत बुरे हैं हम ,.,!!!

Achhe logo ko sab chaha karte hain
Hai koi talabgaar , bahot bure hain ham

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मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए,.,
वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुए,.,!!

Mai khul ke hans to raha hun fakeer hote huye
Wo muskura bhi na paya ameer hote huye

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उन घरों में जहाँ मिट्टी के घडे रहते हैं..,
कद में छोटे हों मगर लोग बङे रहते हैं..,.,!!

Un gharon me jahan mitti ke ghade rahte hai
Kad me chhote hon magar log bade rahte hain

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चाँद में बुढ़िया, बुज़ुर्गों में ख़ुदा को देखें,.,
भोले अब इतने तो ये बच्चे नहीं होते हैं,.,!!

Chand me budhiya , bujurgo me khuda ko dekhe
Bole ab itne to ye bachhe nahi hote

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वो कौन है जिन्हें तौबा की मिल गई फुरसत,
हमें गुनाह भी करने को ज़िंदगी कम है.,.!!!

Wo kaun jinhe tauba ki mil gayi fursat
Hame gunaah bhi karne ko jindagi kam hai

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