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Friday, 30 January 2015

Dil Gaya raunak-e-hayat gayi- Urdu Ghazal Jigar Muradabadi

दिल गया, रौनक-ए-हयात गयी
ग़म गया, सारी कायनात गयी

दिल धड़कते ही फिर गयी वोह नज़र
लब तक आई न थी की बात गयी

दिन का क्या ज़िक्र, तीरह-बख्तों में
एक रात आई, एक रात गयी



उनके बहलाये भी न बहला दिल
रायगाँ सई-ए-इल्तफ़ात गयी

क़ैद-ए-हस्ती से कब नजात जिगर
मौत आयी अगर हयात गयी,.,.!!!

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