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Sunday, 5 March 2017

Hindi SMS, Royal (Nawabi) Urdu Sher, 2 Liners, Shayri, Kavita, Ghazal, Shayri Collection in Hindi Font Part-28

जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है,.,!!

Jo na gujaari na ja saki hamse
Hamne wo jindagi gujari hai




मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को,.,!!

Meri bahon me bahkane ki saja bhi sun le
Ab bahut der me azaad karu ga tujhko






सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है,.,!!

Sabse pahle dil ke khalipan ko bharna
Paisa sari umra kamaya ja sakta hai





बहाना कोई तो दे ऐ जिंदगी ,.,
के जीने के लिए मजबूर हो जाऊं ,.,!!

Bahana koi to de ae jindagi
Ke jeene ke liye majboor ho jau





सहमा सहमा डरा सा रहता है
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है,.,!!

Sahma sahma dara sa rahta hai
Jane kyun jee bhara sa rahta hai





पूछा जो हुस्न क्या है जवानी क्या चीज़ है,
हर- शख्स -की ज़ुबाँ पे तेरा नाम आ गया,.,!!

Poochha jo husn kya hai? Jawani kya cheej hai?
Har shaksh ki juban pe tera naam aa gaya





उसे सोने की ज़ंजीरों से बँधना अच्छा लगता है,
मेरी चाहत के धागों से कहाँ वो शख्स बँधता है,.,!!

Use sone ki janjeeron me bandhna achha lagta hai
Meri chahat ke dhango se kahan wo shaksh bandhta hai





मुस्कुराई तो लब उसके ऐसे दिखे,
बाग़ में कोई गुलाब खिल गया जैसे.,!!

Mukrayee to lab uske aise dikhe
Baag me koi gulaab khil gaya jaise





सारी दुनिया के हैं वो मेरे सिवा
मैं ने दुनिया छोड़ दी जिन के लिए,.,!!

Saari duniya ke hain wo mere siwa
Maine duniya chhod di jinke liye





छोड़ आया हूँ पीछे सब आवाज़ों को
ख़ामोशी में दाख़िल होने वाला हूँ,.,!!

Chhod aaya hun peechhe sab awajon ko
Khamoshi me daakhil hone wala huli





न हार अपनी न अपनी जीत होगी
मगर सिक्का उछाला जा रहा है,.,!!





बे-ज़ार हो चुके हैं बहुत दिल-लगी से हम
बस हो तो उम्र भर न मिलें अब किसी से हम,.,!!





हम पशु में भी भगवान देख लेते हैं।
वो इंसान को भी काफ़िर कह क़त्ल कर देते हैं,.,!!





एक दिल होता तो एक बार टूटता ग़ालिब..
तुम तो सीने में हज़ार दिल लिये फिरते हो,.,!!





जिस नज़र से हुयी थी हमको मोहब्बत
आज भी उस नज़र को तलाशते फिरते हैं,.,!!





बैठे बैठे दिमाग में ख्याल आया
मैं मर-मरा जाऊँगा तो आप सबको पता कैसे चलेगा ?





ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने
लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई,.!!

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