Andhere Charo taraf saany saany karne lage- Rahat Indauri Best Urdu Ghazal




अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे

तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे



लहूलोहान पड़ा था ज़मीं पे इक सूरज
परिन्दे अपने परों से हवाएँ करने लगे

ज़मीं पे आ गए आँखों से टूट कर आँसू
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे

झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले
वो धूप है कि शजर इलतिजाएँ करने लगे

अजीब रंग था मजलिस का, ख़ूब महफ़िल थी
सफ़ेद पोश उठे काएँ-काएँ करने लगे,.,!!!




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Andhere charo taraf saany saany karne lage
Chirag hath utha kar duaayen karne lage

Tarakki kar gaye beemariyon ke saudagar
Ye sab mareej hain jo ab dawayen karne lage

Lahuluhan pada tha jameen pe ek sooraj
Parinde apne paron se hawayen karne lage

Jameen pe aa gaye aankho se toot kar aansoo
Buri khabar hai farishte khatayen karne lage

Jhulas rahe hain hai yaha chhano batne wale
Wo dhoop hai ki iltijayen karne lage

Ajeeb rang tha majlis ka , khoob mehfil thi
safedposh uthe kaanye kaanye karne lage

Har Ek baat pe kahte ho tum ke tu kya hai- Best Urdu Ghazal (Mirza Ghalib)

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है

न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है

ये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसे
वरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या है




चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

वो चीज़ जिसके लिये हमको हो बहिश्त अज़ीज़
सिवाए बादा-ए-गुल्फ़ाम-ए-मुश्कबू क्या है



पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है

रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है

बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता
वगर्ना शहर में "ग़ालिब" की आबरू क्या है ,.,!!!

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-13

अगर इस देश में ही देश के दुश्मन नहीं होते ,.,
लुटेरा ले के बाहर से कभी लश्कर नहीं आता,.,!!!

Agar is desh me hi desh ke dushman nahi hote
Lutera le ke bahar se kabhi lashkar nahi aata

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जिस तरह धागा हो मोतियों में कुछ उलझा सा,
इसी तरह साँसों के दरम्यान हो तुम,.,!!

Jis tarah dhaga ho motiyon me kuchh uljha sa
Isi tarah sanson ke darmyan ho tum

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उसकी आंखें लगें समंदर सी
बचते-बचते भी डूब जाता हूं...!!

Uski aankhe lage samandar si
Bachte bachte bhi doob jata hun

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हर रोज के मिलने से तक़ल्लुफ़ कैसा ??
चाँद सौ बार भी निकले तो नया लगता है ,.,!!!




Har roj ke milne me taqalluf kaisa
Chand sau bar bhi nikle to naya lagta hai



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कोई बतलाओ के इक उम्र का बिछड़ा महबूब
इत्तेफ़ाक़न कहीं मिल जाये तो क्या कहते हैं ??

Koi batlao ke ek umra ka bichhada mahboob
Ittefakan kahi mil jaye to kya kahte hain?

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और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी कभी यूँ ही,
चलता फिरता शहर अचानक तन्हा तन्हा लगता है...!!!

Aur to sab kuchh theek hai lekin kabhi kabhi yun hu
Chalta firta shehar achanak tanha tanha lagta hai

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समझना मुझको मुश्किल है बड़ा शातिर शिकारी हूँ ,.,
मैं ख़न्जर बेचने वाला अहिंसा का पुजारी हूँ ,.,!!!

Samjhna mujhko mushkil hai bada shatir shikari hun
Main khanjar bechane wala ahinsa ka pujari hun

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कोई लाचार है.... इसलिए बीमार है.,.,!!!
कोई बीमार है.... इसलिए लाचार है,.,!!!!

Koi lachar hai isliye beemar hai
Koi beemar hai isliye lachar hai

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हक़ीक़त जिंदगी की ठीक से जब जान जाओगे,
ख़ुशी में रो पड़ोगे और ग़मो में मुस्कुराओगे,.,!!

Haqeeqat jindagi ki theek se jab jaan jao ge
Khushi me ro padoge aur gamo me muskurao ge

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ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे,
फरिश्ते आ के ख़्वाब मेँ हिसाब माँगने लगे!!

Ye jindagi sawal thi jawab mangne lage
Farishte aa ke khwab me hisab mangne lage

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ये दबदबा, ये हुकूमत, ये नशा, ये दौलतें...
सब किरायेदार हैं घर बदलते रहते हैं ,.,!!!

Ye dabdaba, ye huqoomat, ye nasha, ye daulaten
Sab kirayedar hai ghar badalte rahte hain

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उसके मरने पे बहोत लोग जमा थे 'फ़राज़ ',.,
उम्र तमाम जो लोगो के लिए तरसता रहा ,.,!!

Uske marne pe bahot log jama the faraz
Umra tamam jo logo ke liye tarsata raha

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थक गया हूँ ज़िन्दगी को शहर सा जीते हुए
गाँव को फिर से मेरी पहचान होने दीजिये,.,!!

Thak gaya hun jindagi ko shehar sa jeete huye
Gano ko fir se meri pahchan hone dijiye

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तुम इतना जो डूब के लिखते हो,
समझनहीं आता, फिर बचके कैसे निकलते हो !!

Tum itna jo doob ke likhte ho
Samajh nahin aata fir bach ke kaise nikalte ho

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मुझे तूफ़ान में छोड़ के अच्छा किया
मैं जो डूब के उभरुं गा तो कुछ और निकलूं गा ,.,!!

Mujhe toofan me chhod ke achhha kiya
Main jo doob ke ubharu ga to kuchh aur niklu ga

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उनके खुबसुरुत चेहरे से "नकाब" क्या उतरा..!!
ज़माने भर की नियत "बेनकाब" हो गयी..!!

Unke khoobsurat chehare se nakab kya utra
Jamane bhar ki neeyat benaqab ho gayi

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खुद को मात देने के लिए खुद ही अपने खिलाफ खेलता हूँ

Khud ko maat dene ke liye khud hi apne khilaf khelta hun

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दुनिया तेरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ,.,
तू चाँद कहती थी न मुझे , ले मैं डूब रहा हूँ,.,!!!

Duniya teri raunak se doob raha hu
Tu chand kahti thi na mujhe le main doob raha hu

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चेहरा बता रहा था कि...
"मारा है भूख ने
और लोग कह रहे थे कि कुछ खा के मरा है ,,.,!!!

Chehra bata raha the ki maara hai bhookh ne
Aur log kah rahe hain k kuchh kha ke mara hai

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-12

मेरे तो दर्द भी औरो के काम आते है,
मै रो पडु तो कई लोग मुस्कराते है,.,!!!

Mere to dard bhi auron ke kam aate hain
Mai ro padu to kai aur log muskurate hain

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जिसे दुनिया कहते है कोठे की तवायफ है
इशारा किस को करती है नजारा कौन करता है,.,!!!

Jise duniya kahte hain kothe ki tawayaf hai
Ishara  kisko karti hai najara kaun karta hain

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वो दीवाना था, टकरा ही गया.,.,!
लोग कहते रहे "दीवार है- दीवार है"...!!!

Wo deewana tha takra hi gaya
Log kahte rahe deewar hai -deewar hai

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दुनिया वालों ने तो फकत उसको हवा दी थी,.,
लोग तो घर ही के थे आग लगाने वाले,.,!!!

Duniya walon ne to fakat usko hawa di thi
Log to ghar ke hi the aag lagane wale

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हुत दूर तक जाना पड़ता है , सिर्फ यह जानने के लिए,
नज़दीक कौन है,.,!!!

Bahut door tak jana padta hai , sirf ye janne ki liye
Ke najdeek kaun hai

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सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से…
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!

Socha tha ghar bana kar baithu ga sukoon se
Par ghar ki jaruraton ne musafir bana dala

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हम ने पूछा आज मीठे में क्या है ?
उसने ऊँगली उठाई और होंठों पे रख दी..!!!

Hamne poochha aaj meethe me kya hai
Usne ungli uthai aur hontho pe rakh di



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पलकों की हद को तोड़ कर दामन पे आ गिरा एक
अश्क मेरे सब्र् की तौहीन कर गया.,.!!

Palkon ki had ko tod kar daman pe aa gira ek
Ashk mere sabra ki tauhin kar gaya

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जब भी वो गुलशन से बेनकाब गुजरते हैं।
लबों को देख कर उनके भंवरों को भरम होता है।।

Jab bhi wo gulshan se banakab gujarte hain
Labon ko dekh kar unke bhanvron ko bharam hota hai

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सज़ा देना हमें भी आता है
ए बेखबर...
पर तू तकलीफ से गुजरे ये हमें
गवारा नही...!!

Saja dena hame bhi aata hai ae bekhabar
Par tu takleef se gujre ye hame gawara nahin

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तू डालता जा शराब मेरे प्याले में,
जब तक ना निकले वो मेरे खयालो से,.,!!!

Tu dalta ja sharab mere pyale me
Jab tak na nikle wo mere khayalo se

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हाथ में पैमाना , उँगलियों में सिगरेट फँसा है,.,
धुआँ धुआँ यादें हैं, हकीकत बस नशा है ,.,!!!

Haath me paimana, ungliyon me cigarrete fansa hai
Dhuan dhuan yade hain, haqeeqat bas nasha hai

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मैं ज़र्रा लिखता हूँ तो ज़मीन कर देते हैं ,
ये शायर मैं खुद नहीं बना, यारों की मेहरबानी है,.,!!!

Mai jarra likhta hu to jameen kar dete hain
Ye shayar mai khud nahi bana, yaron ki meharbani hai

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दे दीजियेगा बाद मे औरों को मशविरा फ़िलहाल अपना गिरता हुआ घर समेटिये ,.,
फूलों की बात समझें, कहाँ है वो देवता ये दानवों का दौर है, पत्थर समेटिये,.,.!!!

De dijiye ga bad me auron ko mashvira filhal apna girta hua ghar sametiye
Foolon ki baat samjhe , kahan hai wo dewta ye danvon ka daur hai patthar sametiye

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वो बात बात पे देता है परिंदो की मिसाल 'फ़राज़ ',.,
साफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर छोड़ जाओ ,.,!!!

Wo bat bat pe deta hai parindo ki misaal 'faraj'
Saaf saaf nahi kahta mera shehar chhod jao

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बांध कर न रखा करो ज़ुल्फें अपनी
नदी पर का बाँध ढहता है
तबाही मचा देता है,.,!!!

Bandh kar na rakha karo julfen apni
Nadi par ka bandh dhehta hai, tabahi macha deta hai

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कातिलों में ज़मीर ढूढेंगे
क्या महल में कबीर ढूंढेंगे
खेल ऐसा भी एक दिन होगा
सारे पैदल वज़ीर ढूँढेंगे ,.,!!!

Kaatilon ke jameer dhunde ge
Kya mahal me kabeer dhunde ge
Khel aisa bhi ek diun hoga
Sare paidal vajeer dhunde ge

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मेरा मजहब मतलब है, मंदीर और मस्जिद क्या
मतलब निकलते ही मै, खुदा को भुल जाता हुं,.,!!!

Mera majhab matlab hai, mandir aur masjid kya
Matlab nikalte hi main khuda ko bhool jata hu

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शायरी है सरमाया अक्लमंद लोगो का,.,
बांस की हर इक टहनी बांसुरी नही होती,.,!!!

Shayari hai sarmaya aklmand logon ka
Baans ki har ek thehani bansuri nahi hoti

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खुबसुरती के तो सब आशिक़ होते है।
.
किसी को खुबसुरत बनाकर इश्क किया जाये
तो क्या बात है ,.,!!

Khoobsurati ke to sab aashik hote hain
Kisi ko khoobsurat bana kar ishq kiya jaye to kya baat hai

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इश्क की बहुत सारी उधारियां है तुम पर
चुकाने की बात करो तो कुछ किश्तें तय कर लें!!

Ishq ki bahut sari udhariyan hai tum par
Chukane ki bat karo to kuchh kishten tay kar le

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गर आपके पास दिल है..???
तो
धड़कने का बहाना कोई ढूंढो...!!!

Gar aapke pas dil hai to
Dhadkane ka bahan koi dhundo

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कोई और तरीक़ा बताओ जीने का,,.,
साँसे ले ले कर थक गया हूँ,.,!!!

Koi aur tareeka btao jeene ka
Saanse le le kar thak gaya hun

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मै
खुद कभी बेचा करता था दर्दे दिल की दवा…
पर ए दोस्त…
“आज वक़्त मुझे अपनी ही दुकान पर ले आया…!!

Main khud kabhi becha karta tha dard-e-dil ki dawa
Par ae dost
Aaj waqt mujhe apni hi dukan par le aaya

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मारेगी क्या मुझे कोई बंदुक की गोली..
उसकी नजरो से घायल होके बैठे हैं हम...!!

Maare gi kya mujhe koi bandook ki goli
Uski najron se ghayal hoke baithe hain ham

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किसी खंजर और तीर की तुझे दरकादरकार ही क्या।
इक नजर भर के बस तू देख ले मुझे।।

Kisi khanjar aur teer ki tujhe darkaar hi kya
Ek najar bhar ke bas tu dekh le mujhe

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मुद्दत गुज़र गयी कि यह आलम है
मुस्तक़िल
कोई सबब नहीं है मगर दिल उदास है,.,!!!

Muddat gujar gayi ki yah aalam hai mustakil
Koi sabab nahi hai magar dil udaas hai

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उठ-उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गये,.,
दहशतगर्दो के हाथ में इस्लाम रह गया,.,!!!

Uth uth ke masjidon se namaji chale gaye
Dahshat gardon ke hath me islaam rah gaya

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मुझे ना ढूंढ ज़मीन-ओ-आसमान की गर्दिश में
तेरे दिल में अगर नहीं हूँ तो फिर कहीं नहीं हूँ...!!!

Mujhe na dhund jameen-o-aasman ki gardish me
Tere dil me agar nahi hu to fir kahi nahi hun

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वो शख्स ही क्या जो डर जाए अपने हालात की गर्दिश से,
उस दौर में जीना लाज़मी है जिस दौर में जीना मुश्किल हो,.,!!!                        

Wo shaksh hi kya ho dar jaye apne halaat ki gardish se
Us daur me jeena laajmi hai jis daur me jeena mushkil ho

Usoolon pe aanch aaye to takrana jaruri hai- Wasim Barelawi Urdu Ghazal

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये
कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है



थके हारे परिन्दे जब बसेरे के लिये लौटे
सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है






बहुत बेबाक आँखों में त'अल्लुक़ टिक नहीं पाता
मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है

सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है

मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
कि इस के बाद भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है,.,!!

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Usoolon pe jahan aanch aaye takrana jaruri hai
Jo jinda ho to fir jinda najar aana jaruri hai

Nayi umron ki khudmukhtarion ko kaun samjhaye
Kahan se bach k chalna hai, kahan jana jauri hai

Thake hare parinde jab basere ke liye laute
To saleekamand sakhon ka lachak jana jaruri hai

Bahut bebaak aankhon me talluk tik nahi pata
Mohabbat me kashish rakhne ko sharmana jaruri hai

Saleeka hi nahi shayad use mahsoos karne ka
Jo kahta hai khuda hai to najar aana jaruri hai

Mere honthon pe apni pyaas rakh do aur fir socho
Ki iske bad bhi duniya me kuchh pana jaruri hai

Royal Ghazal By Basheer Badra (Gaon Mit jaye ga ,Shehar jal jaye ga)

गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगा
ज़िन्दगी तेरा चेहरा बदल जायेगा,.,.!!





कुछ लिखो मर्सिया मसनवी या ग़ज़ल
कोई काग़ज़ हो पानी में गल जायेगा,.,.!!





अब उसी दिन लिखूँगा दुखों की ग़ज़ल
जब मेरा हाथ लोहे में ढल जायेगा,.,.!!

मैं अगर मुस्कुरा कर उन्हें देख लूँ
क़ातिलों का इरादा बदल जायेगा,.,.!!

आज सूरज का रुख़ है हमारी तरफ़
ये बदन मोम का है पिघल जायेगा,.,.!!

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Gaon mit jaye ga shehar jal jaaye ga
Jindagi tera chehara badal jaye ga

Kuchh likho marsiya, masanavi ya ghajal
Koi kaagaj ho pani me gal jaye ga

Ab usi din likhun ga dukhon ki ghajal
Jab mera hath lohe me dhal jaye ga

Mai agar muskura kar unhe dekh lun
Kaatilon ka irada badal jaaye ga

Aaj sooraj ka rukh hai hamari taraf
Ye badan mom ka hai pighal jaye ga

Bahut Pani Barasta hai to mitti baith jati hai- Munnawar Rana Ghazal

बहुत पानी बरसता है तो मिट्टी बैठ जाती है
न रोया कर बहुत रोने से छाती बैठ जाती है,.,.!!!

यही मौसम था जब नंगे बदन छत पर टहलते थे
यही मौसम है अब सीने में सर्दी बैठ जाती है,.,.!!!

चलो माना कि शहनाई मोहब्बत की निशानी है
मगर वो शख़्स जिसकी आ के बेटी बैठ जाती है,.,.!!!




बढ़े बूढ़े कुएँ में नेकियाँ क्यों फेंक आते हैं ?
कुएँ में छुप के क्यों आख़िर ये नेकी बैठ जाती है ?



नक़ाब उलटे हुए गुलशन से वो जब भी गुज़रता है
समझ के फूल उसके लब पे तितली बैठ जाती है,.,.!!!

सियासत नफ़रतों का ज़ख्म भरने ही नहीं देती
जहाँ भरने पे आता है तो मक्खी बैठ जाती है,.,.!!!

वो दुश्मन ही सही आवाज़ दे उसको मोहब्बत से
सलीक़े से बिठा कर देख हड्डी बैठ जाती है,.,.!!!

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Bahut paani barsata hai to mitti baith jati hai
Na roya kar , bahut rone se chhati baith jati hai

Yahi mausham tha jab nange badan chhat par tahalate the
Yahi mausham hai ab seene me sardi baith jati hai

Chalo mana ki shehanai mohabbat ki nishani hai
Magar wo shaksh jiski aakar beti baith jati hai

Bade budhe kuyen me nekiyan kyon fenk aate hain ?
Kunye me chhup ke kyon ye aakhir neki baith jati hai

Naqab ulte huye wo gulshan se jab bhi gujarta hai
Samajh ke fool lab pe uske titali baith jati hai

Siyasat nafaraton ka jakhm bharne hi nahi deti
Jahan bharne pe aata hai makhhi baith jati hai

Wo dushman hi awaaj se usko mohabbat se
Saleeke se bitha kar dekh haddi baith jati hai

Best Urdu Sher of Munnawar Rana in Hindi Font

हुकूमत मुंह भराई के हुनर से खूब वाक़िफ़ है ,.,
ये हर कुत्ते के आगे शाही टुकड़े दाल देती है ,.,!!

Hukoomat munh bharaai ke hunar se khoob vaakaif hai
ye har kutte ke aage shahi tukada dal deti hai


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मियाँ मैं शेर हूँ ,शेरों की गुर्राहट नहीं जाती ,.,
मैं लहजा नर्म भी कर लूँ तो झुंझलाहट नहीं जाती ,.,
मैं एक दिन बेख्याली में कहीं सच बोल बैठा था ,.,
मैं कोशिश कर चुका हूँ ,मुंह की कड़वाहट नहीं जाती ,.,!!!






Miyan main sher hoon sheron ki gurrahat nahin jaati
main lahaja narm bhi kar loon to jhunjhalahat nahin jaati
 main ek din bekhyali men kahin sach bol baitha tha
main koshish kar chuka hoon, munh ki kadavahat nahin jaati


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मैंने फल देख के इंसानो को पहचाना है ,.,
जो बहुत मीठे हैं अंदर से सड़े होते हैं ,.,!!!

Mainne fal dekh ke insan ko pahachaana hai
jo bahut meethe hon andar se sade hote hain



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लबों पे मुस्कराहट और दिल में बेज़ारी निकलती है ,.,
बड़े लोगों में अक्सर ये बीमारी निकलती है ,.,!!!

Labon par muskurahat dil men bezari nikalti hai
bade logon men hi aksar ye beemari nikalti hai 


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Best Kavita- Tum Lakh chahe meri aafat me jaan rakhna- Dr. Kumar Vishwas

तुम लाख चाहे मेरी आफ़त में जान रखना
पर अपने वास्ते भी कुछ इम्तहान रखना

वो शख़्स काम का है, दो ऐब भी हैं उसमें
इक सर उठाना दूजा मुँह में ज़बान रखना






बदली सी एक लड़की से कुल शहर ख़फ़ा है
वो चाहती है पलकों पर आसमान रखना



केवल फ़क़ीरों को है ये कामयाबी हासिल
मस्ती में जीना और खुश सारा जहान रखना.


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"Tum Laakh Chahe Meri Aafat Mein Jaan Rakhna
Par Apne Waaste Bhi Kuchh Imthaan Rakhna

Wo Shakhs Kaam Ka Hai, Do Aib Bhi Hain Usmein
Ik Sar Uthaana Duja Moonh Mein Zabaan Rakhna

Badli Si Ek Ladki Se Kul Shahar Khafa Hai
Wo Chahati Hai Palkon Par Aasmaan Rakhna

Kewal Faqeeron Ko Hai Ye Kaamyaabi Haasil
Masti Mein Jeena Aur Khush Sara Jahaan Rakhnaa.

Best Ghazal- Pas rah kar juda si lagti hai- Basheer Badra

पास रहकर, जुदा सी लगती  है ,
जिंदगी बे, वफा सी लगती है.,.!!!

मै तुम्हारे, बगैर भी जी लूँ ,
ये दुआ बद दुआ, सी लगती है ,.,!!!

नाम उसका, लिखा है आँखों में,
आसुओं की, ख़ता, सी लगती है,.,!!!



वो भी इश, तरफ से गुज़रा है ,
ये ज़मी आसमां, सी लगती है ,.,!!!

प्यार करना, भी जुर्म है शायद ,
आज दुनिया, खफ़ा, सी लगती है ,.,!!!

पास रहकर, जुदा, सी  लगती है ,
जिंदगी बे, वफा सी लगती है .,.,!!!




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Paas rah kar juda si lagti hai
Jindagi bewafa si lagti hai

Mai tumhare bagair bhi jee lun
Ye dua , bad dua si lagti hai

Naam uska likha hai aankhon me
Aansuon ki khata si lagti hai

Wo bhi is taraf se gujra hai
Ye jameen aasman si lagti hai

Pyar karna bhi jurm hai sayad
Aaj duniya khafa si lagti hai

Paas rah kar juda si lagti hai
Jindagi bewafa si lagti hai

Madhushala Ki Chuninda panktiyan- Harivansh Rai Bachhan

Read More about bachhan sahab-http://en.wikipedia.org/wiki/Harivansh_Rai_Bachchan

Madhushala (The house of wine) bachhan ji ki sarvadhiak prashiddh aur uttam rachnao me se ek hai
To aanand lijiye Madhushala ki kuch chuninda panktiyo ka

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला,.,!!!


मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला,
'किस पथ से जाऊँ?' असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ
राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला,.,!!!


हाथों में आने से पहले नाज़ दिखाएगा प्याला,
अधरों पर आने से पहले अदा दिखाएगी हाला,
बहुतेरे इनकार करेगा साकी आने से पहले,
पथिक, न घबरा जाना, पहले मान करेगी मधुशाला,.,!!!


एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला,.,!!!






मुसलमान औ' हिन्दू है दो, एक, मगर, उनका प्याला,
एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला,
दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मन्दिर में जाते,
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला,.,!!!



कोई भी हो शेख नमाज़ी या पंडित जपता माला,
बैर भाव चाहे जितना हो मदिरा से रखनेवाला,
एक बार बस मधुशाला के आगे से होकर निकले,
देखूँ कैसे थाम न लेती दामन उसका मधुशाला,.,,.!!!


और चिता पर जाये उंढेला पात्र न घ्रित का, पर प्याला
कंठ बंधे अंगूर लता में मध्य न जल हो, पर हाला,
प्राण प्रिये यदि श्राध करो तुम मेरा तो ऐसे करना
पीने वालों को बुलवा कऱ खुलवा देना मधुशाला,.,.,!!!


मद, मदिरा, मधु, हाला सुन-सुन कर ही जब हूँ मतवाला,
क्या गति होगी अधरों के जब नीचे आएगा प्याला,
साकी, मेरे पास न आना मैं पागल हो जाऊँगा,
प्यासा ही मैं मस्त, मुबारक हो तुमको ही मधुशाला,.,!!


मैं मदिरालय के अंदर हूँ, मेरे हाथों में प्याला,
प्याले में मदिरालय बिंबित करनेवाली है हाला,
इस उधेड़-बुन में ही मेरा सारा जीवन बीत गया -
मैं मधुशाला के अंदर या मेरे अंदर मधुशाला,.,!!!


अपने युग में सबको अनुपम ज्ञात हुई अपनी हाला,
अपने युग में सबको अदभुत ज्ञात हुआ अपना प्याला,
फिर भी वृद्धों से जब पूछा एक यही उत्तर पाया -
अब न रहे वे पीनेवाले, अब न रही वह मधुशाला ,.,!!!

Mom ke pas kabhi aag ko lakar dekhu - Rahat Indauri Ghazal

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ

कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में
और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ

मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर
दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ






दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ

तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज है
मैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूँ

याद आता है के पहले भी कई बार यूं ही
मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूँ,.,!!!

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Mom ke paas kabhi aag ko lakar dekhun
Sochta hun ke tujhe haath laga kar dekhu

Kabhi chupke se chala aaun teri khilwat me
Aur tujhe teri nigahon se bacha kar dekhun

Maine dekha hai jamane ko sharaben peekar
Dam nikal jaaye agar hosh me aakar dekhun

Dil ka mandir bada veeran najar aata hai
Sochta hun teri tasveer laga kar dekhun

Tere bare me suna ye hai ke tu sooraj hai
Mai jara der tere saaye me aa kar dekhun

Yaad aata hai ke pahle bhi kai bar yu hi
Maine socha tha ke main tujhko bhula kar dekhun

Bahut Khoobsurat ho tum- Tahir Faraz Ghazal

Tahir Faraz Ghazal - Bahut Khoobsurat ho tum



Bahut Khubsurat Ho Tum
Bahut Khubsurat Ho Tum.
Kabhi Main Jo Keh Doo Mohabbat Hai Tum Se
Meri Mahobbat Ko Galat Na Samazana
Ke Khuda Ki Kasam Se Murat Ho Tum
Bahut Khubsurat Ho Tum.
Hai Phoolon Si Naazuk Muskaan Tumhari
Hai Khamosh Jadoo Jubaan Tumhari
Har Jakham Ko Tumhare Apne Seene Se Lagaa Lun
Shabnami Tabbssum Se Tere Hotho Ko Sajaa Loo
Nazar Se Zamane Ki Khud Ko Bachaana
Kissi Aur Se Dekho Jaanu Dil Na Lagaana
Ke Mere Kurbat Ho Tum






Bahut Khubsurat Ho Tum.
Yaado Par Meri Hai Pehra Tumara
Rubru Hai Hardam Ye Chehra Tumara
Gulaabo Sa Nazuk Mehekta Badan Hai
Yeh Lab Hai Tumhare Ya Khilta Chaman Hai.
Lehraaye Aanchl To Sharmaaye Badal
Yeh Zahid Bhi Dekhe To Ho Jaye Pagal
Oh Pakiza Murat Ho Tum
Bahut Khubsurat Ho Tum.
Bikheron Teri Zulfein To Sharmaye Raateein
Khwaabo Ki Saugaate Hai Teri Mulakaatein
Dil Pe Tune Jaane Kya Jaadu Kiya
Dhadkano Ko Tune Bekaabu Kiya Hai
Ki Meri Jarurat Ho Tum
Bahut Khubsurat Ho Tum.

Mehfil- Royal (Nawabi) Urdu Sher, Shayri Collection Part-2

Mehfil- Royal (Nawabi) Urdu Sher, Shayri Collection  Part-1

सवाल आप हैं गर तो जवाब हम भी हैं ,.,.
हैं आप ईंट तो पत्थर जनाब हम भी हैं,.,!!!

Sawal aap hai gar to jawab ham bhi hain
Hai aap eent to patthar janab ham bhi hain

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सुना है की समन्दर को बहुत गुमान आया है,,.
उधर ही ले चलो कश्ती जिधर तूफ़ान आया है.,.!!!

Suna hai ke samandar ko bahut guman aaya hai
Udhar hi le chalo kashti jidhar toofan aaya hai


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जब दुशमन पत्थर मारे तो उसका जवाब फूल से दो..
पर वो फूल उसकी कबर पर होना चाहिये ..!!!

Jab dushman patthar mare to uska jawab fool se do
Par wo fool uski kabra par hona chahiye

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तेरी वफ़ा की खातिर जलील किया तेरे शहर के लोगो ने ।।
एक तेरी फिकर न होती तो जला देते तेरे शहर को ।।

Teri wafa ki khatir jaleel kiya tere shehar ke logon ne
Ek teri fikar na hoti to jala dete tere shehar ko

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खून मे ऊबाल, वो आज भी खानदानी है,.,
दुनिया हमारे शौक की नहीं , हमारे तेवर की दिवानी है,.,!!!

Khoon me ubaal , wo aaj bhi khandani hai
Duniya hamare shauk ki nahi hamare tewar ki diwani hai



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मै रिश्तों का जला हुआ हूँ....
दुश्मनी भी फूँक - फूँक कर करता हूँ...!!!

Mai rishton ka jala hua hun
Dushmani bhi phoonk phoonk kar karta hu

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चल पड़ा हूँ अब मैं भी ज़माने के उसूलों पे ,.,
अब मैं भी अपनी बातों से मुकर जाता हूँ ,.,!!!

Chal pada hun ab mai bhi jamane ke usoolon pe
Ab mai bhi apni baton se mukar jata hun

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गम के पास तलवार, मैं उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..!
ऐ जिंदगी ! तेरी हर चाल के लिए मैं एक चाल लिए बैठा हूँ..!!!

Gam ke pas talwar, main ummeed ki dhal liye baitha hu
Ae jindagi ! teri har chal ke liye main ek chal liye baitha hun

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अभी तो जवान हो तुम क्या नमाज क्या रोजा....?
अभी तो उम्र पड़ी है चलो शराब पीयें ,.,!!!

Abhi to jawan ho tum kya namaj kya roja?
Abhi to umra padi hai chalo sharab piye

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-11

ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती,.,
पहले दीप जलें तो चर्चे होते थे और अब शहर जलें तो हैरत नहीं होती,.,!!

Khak se badh kar koi daulat nahi hoti, chhoti moti bat pe hijrat nahi hoti
Pahle deep jalen to charche hote the aur ab shehar jalen to hairat nahi hoti

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सच की हालत किसी तवायफ सी है,
तलबगार बहुत हैं तरफदार कोई नही.,.,!!

Sach ki halat kisi tawayaf si hai
Talabgar bahut hain tarafdar koi nahi

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इलाज ए इश्क पुछा जो मैने हकीम से
धीरे से सर्द लहजे मे वो बोला
जहर पिया करो सुबह दोपहर शाम,.,!!!

Ilaaj-e-ishq poochha jo maine hakeem se
Dheere se sard lahje me wo bola
Jahar piya karo subah dophar sham

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दुनिया में सब चीज़ मिल जाती है,,,
केवल अपनी ग़लती नहीं मिलती...!!


Duniya me sab cheej mil jati hai
Keval apni galti nahi milti

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जो अंधेरे की तरह डसते रहे ,अब उजाले की कसम खाने लगे
चंद मुर्दे बैठकर श्मशान में ,ज़िंदगी का अर्थ समझाने लगे,..,!!

Jo andhere ki tarah daste rahe, ab ujaale ki kasam khane lage
Chand murde baith kar shamsham me, jindagi ka arth samjhane lage

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हलकी हलकी सी सर्द हवा ,जरा जरा सा दर्द ए दिल
अंदाज अच्छा है ए नवम्बर तेरे आने का,.,!!!

Halki halki si sard hawa , jara jara sa dard-e-dil
Andaaj achha hai ae november tere aane ka

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मोहब्बत हमने सीखी है चराग़ों की शमाओं से
कभी तो रात आएगी कभी तो लौ जलाओगे,.!!

Mohabbat hamne sikhi hai charagon ki shamaon se
Kabhi to rat aaye gi kabhi to lau jalao ge



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पहचान कहाँ हो पाती है, अब इंसानों की,.,
अब तो गाड़ी, कपडे लोगों की, औकात तय करते हैं,.,!!

Pahchan kahan ho paati hai, ab insano ki
Ab to gaadi , kapde logon ki , aukat tay karte hain

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आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले...
जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए.!!

Aakhir tum bhi us aaine ki tarah hi nikle
Jo bhi samne aaya tum usi ke ho gaye

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दिलों में खोट है ज़ुबां से प्यार करते हैं...
बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते हैं

Dilon me khot hai juban se pyar karte hain
Bahut se log duniya me yahi vyapar karte hain

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मुझ से पत्थर ये कह कह के बचने लगे ,
तुम ना संभलोगे ठोकरें खा कर ..!!

Mujhse patthar ye kah kah ke bachne lage
Tum na sambhlo ge thokre kha kar

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पडेगा हम सभी को अब खुले मैदान मे आना,.,
घरों मे बात करने से ये मसले हल नही होंगे,.,!!!

Pade ga ham sabhi ko ab khule maidan me aana
Gharo me baat karne se ye masle hal nahi honge

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पालते हैं वे कबूतर पर कतरने के लिए,.,
ताकि बेबस हों उन्हीं के घर उतरने के लिए,.,!!

Palte hai ve kabootar par katrane ke liye
Taki bebas hon unhi ke ghar utarne ke liye

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मैं छुपाना जानता तो जग मुझे साधू समझता
शत्रु मेरा बन गया है छलरहित व्यवहार मेरा,.,.!!

Mai chhupana janta to jag mujhe sadhu samajhta
Shatru mera ban gaya hai chhalrahit vyavhar mera

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सुना था तेरी महफिल में सुकूने-दिल भी मिलता है,.,
मगर हम जब भी तेरी महफिल से आये, बेकरार आये,.,!!!

Suna tha teri mehfil me sukoon-e-dil bhi milta hai
Magar ham jab bhi teri mehfil se aaye bekarar aaye

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गरीबी थी जो सबको एक आंचल में सुला देती थी.,.,
अब अमीरी आ गई सबको अलग मक़ान चाहिए...!!

Gareebi thi jo sabko ek aanchal me sula deti thi
Ab ameeri aa gayi sabko alag makan chahiye

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दर्द के सिवा कभी कुछ न दिया,
गज़ब के हमदर्द हो आप मेरे !!!

Dard ke siwa kabhi kuchh na diya
Ghajab ke hamdard ho aap mere

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ना जाने वो बच्चा किससे खेलता होगा…
वो जो मेले में दिन भर खिलौने बेचता हैं,.,!!

Na jaane wo bachha kisse khelta hoga
Wo jo mere me din bhar khilaune bechta hai

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तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी,
तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया।

Teri mehfil se uthe to kisi ko khabar tak na thi
Tera mud mud kar dekhna hame badnam kar gaya

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परिन्दों की फ़ितरत से आए थे वो मेरे दिल में।
ज़रा पंख निकल आए तो आशियाना छोड दिया॥

Parindon ki fitrat se aaye the wo mere dil me
Jara pankh nikal aaye to aahiyana chhod diya

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ख्वाब ख्याल, मोहब्बत, हक़ीक़त, गम और तन्हाई,
ज़रा सी उम्र मेरी किस-किस के साथ गुज़र गयी !!!            

Khwab khayal , mohabbat , haqeeqat, gham aur tanhai
Jara si umra meri kis kis ke sath gujar gayi

Rui ka gadda bech kar, Maine ek dari khareed li (रुई का गद्दा बेच कर मैंने, इक दरी खरीद ली)



रुई का गद्दा बेच कर मैंने, इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने, और ख़ुशी खरीद ली !!

सबने ख़रीदा सोना मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी डोरी ख़रीद ली !!



मेरी एक खवाहिश मुझसे ,मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने, अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली !!


इस ज़माने से सौदा कर, एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और, शामें खरीद ली !!


शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से और कुछ कम किये,
फ़िर सस्ते में ही "सुकून-ए-ज़िंदगी" खरीद ली,.,!!!


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Rui ka gaddda bech kar maine , ek dari khreed li
Khwaishon ko kuchh kam kiya maine aur khushi khareed li

Sabne khreeda sona maine ek sui khareed li
Sapno ko bunne jitni dori khareed li

Meri ek khwaish mujhse , mere dost ne khareed li
Fir uski hansi se maine, apni kuchh ur khushi khareed li

Is jamane se sauda kar , ek jindagi khareed li
Dino ko becha aur shame khareed li

Shauk-e-jindagi kamtar se aur kuchh kam kiye
Fir saste me hi sukoon-e-jindagi khareed li

Chehron ke liye aaine qurban kiye hain -Rahat Indauri

Rahat Indauri Sahab ka bahot hi umda sher-

चेहरों के लिए आईने क़ुर्बान किये हैं ,,.,
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं ,.,



महफ़िल में मुझे गालियां देकर है बहोत खुश ,
जिस शक्श पे मैंने बड़े बड़े एहसान किये हैं ,.,!!

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Cheharon ke liye aaine kurban kiye hain
Is shauk me apne bade nuksan kiye hain

Mehfil me mujhe galiyan dekar hai bahot khush
Jis shaksh pe maine bade bade ehsaan kiye hain

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-10

समझते थे मगर फिर भी न रखी दूरियां हमने
चरागों को जलाने में जला ली उंगलियाँ हमने,..!!

Samajhate the magar fir bhi na rakhi duriyan hamne
Charagon ko jalane me jala li ungliyan hamne

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मुझ पर सितम ढा गयें मेरी ही गझल के शेर
पढ़ पढ़ के वो खो रहे है किसी और के खयाल में,.,!!!

Mujh par sitam dha gaye meri hi ghajal ke sher
Padh padh ke vo kho rahe hain kisi aur ke khayal me

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फुटपाथ का बिस्तर है तो तकीया है ईट का
यहां कौन युं नींद के मजे लूट रहा है !!!

Footpath ka bistar hai to takiya hai eent ka
Yahan kaun yun neend ke maje loot raha hai

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नर्म नर्म फूलों का रस निचोड़ लेती हैं ,
पत्थर के दिल होते हैं इन तितलियों के ..!!

Narm narm foolon ka ras nichod leti hai
Patthar ke dil hote hain in titaliyon ke

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ग़लतफ़हमियों के सिलसिले आज इतने दिलचस्प हैं
कि हर ईंट सोचती है दीवार मुझपे टिकी हैं,.,!!

Galatfahmiyon k silsile aaj itne dilchasp hai
Ke has eent sochti hai deewar mujhpe tiki hai

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तुम ने कुछ पढ़ दिया दुआ में क्या??
आज तबियत में कुछ आराम सा है !!

Tumne kuchh padh liya dua me kya?
Aaaj tbiyat me kuchh aaram sa hai

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सदियो का रतजगा मेरी रातों मे आ गया,.
मैं किसी हसिन शख्स की बातों मे आ गया,.,!!

Sadiyo ka ratjaga meri raton me aa gaya
Main kisi haeen shakhs ki bato me aa gaya



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जो समझे नही कभी माँ बाप के प्यार को ,.,
वो कहते है 'हमें बड़ा इश्क़ है किसी से ',.,!!

Jo samajhe nahi kabhi ma baap ke pyar ko
Wo kahte hain ' hamen bada ishq hai kisi se'

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सिगरेट के धुएँ में मरहम ढूँढते-ढूँढते
वो खुदको हजार दफे जलाना याद हैं,.,!!

Ciegarette ke dhuyen me marham dhundte dhundte
Wo khud ko hajar dafe jalana yaad hai

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ऐसे रहबर अब नहीं चाहिए हमें,,,
काफ़िले को छोड़ कर चल दे जो मझधार में..,!!

Aise rahbar ab nahi chahiye hamen
Kaafile ko chhod kar chal de jo majhdhar me

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फिर ना जागा कभी मन में वो बचपन का एहसास,
हमने साईकिल, खिलौने, कंचेे खरीद के देख लिए...!!

Fir na jaga kabhi man me wo bachpan ka ehsas
Hamne cycle , khilaune kanche khareed ke dekh liye

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तेरे ही नाम से ज़ाना जाता हूं मैं,
ना जाने ये " शोहरत" है या "बदनामी",.,!!!

Tere hi haam se jana jata hun mai
Na jane ye shohrat hai ya badnami

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किफायती दरों पर एहसास बिक रहे हैं,,.,
चलो थोड़े तुम खरीद लो थोड़े मैं खरीद लूँ,.,!!!

Kifayati daron pe ehsaas bik rahe hain
Chalo thode tum khareed lo thode mai khreed lun

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जिस नजाकत से ये लहरे मेरे पैरो को छुती है,.,.
यकीन नही होता की ये तमाम कश्तियाँ डूबोकर आ रही है,.,!!

Jis najakat se ye lahre mere pairon ko chhuti hain
Yakeen nahi hota ki ye taman kashityan dubo kr aa rahi hain

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मुझे भंवर में ही छोड़ आते तो, बात तुम पर कभी ना आती ....!!
ये तेरा साहिल पे लाकर डुबोना , कोई सुनेगा तो क्या कहेगा...!!!

Mujhe bhanvar me hi chhod aate to , bat tum par kabhi na aati
Ye tera saahil pe lakar dubona koi sune ga to kya kahe ga

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नब्ज कांटी तो खून लाल ही निकला....!
सोचा था सबकी तरह ये भी बदल गया होगा..!!          

Nabj kati to khoon laal hi nikla
Socha tha sabki tarah ye bhi badal gaya hoga

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-9

वो मेरे पास से गुजरा , न दिल धड़का न लब लरजे ,.,
क़यामत है ख़ामोशी से क़यामत का गुजर जाना ,.,!!!

Wo mere paas se gujra, na dil dhadka na lab larje
Kayamat hai khamoshi se kayamat ka gujar jana

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शायरी करने से लड़की नहीं पटती...
लड़की पटने के बाद शायरी बनती है ,.,!!

Shayari karne se ladki nahin patti
Ladki patne ke bad shayari banti hai

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साकी कहां किस्मत मे अब वो छलकते पैमाने ,.,
हम यादो के पैमाने चुम कर सुखे होठ भीगो लेते है,.,!!

Saaki kahan kismat me ab wo chhalakte paimane
Ham yadon ke paimane choom kar sukhe honth bhigo lete hain
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यही बात उनकी सारे जमाने से जुदा है ,.,
वो हार के भी हार कभी मानते नही,.,!!!

Yahi baat unki sare jamane se juda hai
Wo haar ke bhi haar kabhi mante nahi




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कातिल तू नहीं...कातिल मैं नहीं...चलो मिलकर ढ़ूड़ते हैं...कातिल कौन
 है...?

Kaatil tu nahi .. kaatil mai nahi.. chalo mil kar dhundte hain.. kaatil kaun hai?

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बेवजह रोये जा रहा है वो रोनेवाला ,.,
उसे समझाओ कोई उसका नही होनेवाला,.!!!

Bewajah roye ja raha hai rone wala
Use samjhao koi uska nahi hone wala

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कुछ भी लिखना सरल नहीं है पूछो हम फ़नकारों से
हम सब लोहा काट रहे हैं का़गज़ की तलवरों से,.,!!

Kuchh bhi likhna saral nahi hai poochho ham fankaron se
Ham sab loha kaat rahe hain kaagaj ki talwaron se

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मेरे हिस्से की जमीं बंजर थी मै वाकीफ न था,.,
बेसबब इल्जाम मै देता रहा बरसात को,.,!!!

Mere hisse ki jameen banjar thi mai waqif na tha
Besabab iljaam mai deta raha barsaat ko

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दोस्तों की महफ़िल में अब कहाँ ज़िक्र होता है मेरा,.,
दुश्मनो में तो मेरा चर्चा खूब होता है ..,.!!

Doston ki mehfil me ab kahan jikra hota hai mera
Dushmano me to mera charcha khoob hota hai

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हर मोड़ पे रुके हम आवाज़ देते गये,.,
देखा न मुड़ के तुमने जो तुमने ठान ली...!!

Har mod pe ruke ham awaaj dete gaye
Dekha na mud ke tumne jo tumne than li

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मेरे दुश्मन तक मुझसे अब दूर रहने लगे है,
कहते है.. इसने खुद ही मोहब्बत कर ली,
इसका अब हम क्या बिगाड़े..!!

Mere dushman tak mujhse ab door rahne lage hain
Kahte hai.. isne khud hi mohabbat kar li
Iska ab ham kya bigaden

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अपने मेहमान को पलको पे बिठा लेते है
गरीबी जानती है घर मे बिछौने कम है,.,!!

Apne mehman ko palkon pe bitha lete hai
Gareebi janti hai ghar me bichhaune kam hai

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वो मेरे दिल से बाहर निकलने का रास्ता न ढुंढ सके ,.,
दावा करते थे जो मेरी रग-रग से वाकीफ होने का,.,!!!

Wo mere dil se bahar nikalne ka rasta na dhund sake
Dava karte the jo meri rag rag se waqif hone ka

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मन की चादर बहुत मैली है
आओ चलके गंगा को गंदा करे
बहुत दिनो से सुकुं है यहां
आओ चलके दंगा करे,.,!!!

Man ki chadar bahut maili hai
Aao chalke ganga ko ganda kare
Bahut dino se sukoon hai yaha
Aao chalke danga kare

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इसलिये तो अंधेरा है मैकदे मे बहुत
लोग यहा घरो को जलाकर शराब पिते है

Isliye to andhera hai maikade bahut
Log yaha gharon ko jala kar sharab pete hai

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समझते थे मगर फिर भी न रखी दूरियां हमने
चरागों को जलाने में जला ली उंगलियाँ हमने,..!!    

Samajhte the magar fir bhi na rakhi dooriyan hamne
Charagon ko jalane me jala li ungliyan hamne

Shehar Zaalimon ka hai sahab, Zara Sambhal kar Chalna

शहर जालिमों का है'"साहब'
जरा संभल कर चलना
यहाँ लोग सीने से लगकर
दिल निकाल लेते ह.,.,!!!






Shehar zaalimon ka hai "Sahab"
zara sambhal kar chalna
Yahan log seene se lag kar 
Dil Nikal lete hain

Main kah to dun ye mumkin hai by Ashish Awasthi

मैं कह तो दूँ ये मुमकिन है
फिर जो हो न पाया तो क्या होगा ?

 तू यकीनन सुने गा मेरे अल्फ़ाज़ गौर से
पर बाद इंकार के , एक हादसा तो होगा




 आ जाता हूँ मैं भी इस काफिरों के  शहर  में
फिर जो तूने न पहचाना तो अब क्या होगा ?

 डूबता है सूरज ,चाँद भी है डूबता
जो डूबी आज रात तो ये अच्छा न होगा







 कितने रास्ते चला हूँ इस मंज़िल तक आने को पर
समझा नही क्या इस फासले का सबब होगा

 तू बढ़ा ले सन्नाटा कितना भी इस महफिले में पर
मेरी आहटों ,मेरी दस्तकों का कुछ तो असर होगा

 हमारा क्या हम तो हद में भी बेहद अजीज हैं
जो तूने तोड़ी हैं सरहदे तो अब अंजाम क्या होगा ?

 सब हो जाये गए रुखसत शहर -ए -जिंदगी से एक रोज
तू सोच तेरे बचने का तरीका क्या होगा ,.,.,!!!
                                                       
                                                            - आशीष अवस्थी

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Mai kah to du ye mumkin hai
Fir jo na ho paya to kya hoga ?

Tu yakeenan sunega mere alfaj gaur se
Par bad inkar ke ek hadsa to hoga

Aa jata hun mai bhi in kafiron ke shehar me
Fir jo tune na pahchana to ab kya hoga ?

Doobta hai sooraj, chand bhi doobta
Jo doobi aaj rat to ye achha na hoga

Kitne raste chala hu is manjil tak aane ko par
Samjha nahi kya is fasle ka sabab hoga

Tu badha le sannata kitna bhi is mehfil me par
Meri aahaton, meri dastakon ka kuchh to asar hoga

Hamara kya ham to had me bhi behad ajeej hai
Jo tune todi hain sarhaden to ab anjaam kya hoga

Sab ho jaye ge rukhsat shehar-e-jindagi se ek roj
Tu soch tere bachne ka tarika kya hoga ??

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-8

महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी,
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा..

Mahboob ka ghar ho ya fariston ki jameen
Jo chhod diya fir use mud kar nahi dekha

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इश्क करो तो आयुर्वेदिक वाला करो
फायदा ना हो तो नुक़सान भी ना हो--!!

Ishq karo to ayurvedic wala karo
Fayda na ho to nuksaan bhi na ho

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बिखरने दो होंठों पे हँसी की फुहारों को,
प्यार से बात कर लेने से दौलत कम
नहीं होती..!!!

Bikharne do hontho pe hansi fuharon ko
Pyaar se baat kar lene se daulat kam nahi hoti

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शिद्दत -ए -दर्द से शर्मिंदा नहीं मेरी वफ़ा 'फ़राज़ ',.,
दोस्त गहरे हों तो फिर जख्म भी गहरे होंगे ,.,!!!

Shiddat -e-dard se sharminda nahi meri wafa faraz
Dost gahre ho to fir jakhm bhi gahre honge

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गीली लकड़ी सा इश्क तुमने सुलगाया है, .
. ना पूरा जल पाया कभी, न बुझ पाया है..,.,!!!

Geeli lakdi sa ishq tumne sulgaya hai
Na pura jal paaya kabhi na bhujh paaya hai

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मेरी गजलों में ढल गया, चाँद कितना बदल गया होगा,
रास्तों को वो जनता कब था, पाँव ही था फिसल गया होगा,.,!!

Meri ghajalo me dhal gaya , chand kitana badal gaya hoga
Raston ko wo jaanta kab tha, paano hi tha fisal gaya hoga

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यह संगदिल लोगों की दुनिया है... ज़रा संभलकर चलना मेरे दोस्त...!
यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है..... नज़रों से गिराने के लिए.....!!

Ye sangdil logo ki duniya hai, jara sambhal kar chalna mere dost
Yahan palkon pe bithaya jaata hai, najaron se giraane ke liye

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वो नदी थी वापस मुड़ी नहीं ,.,
मैं समंदर था आगे बढ़ा नहीं ,.,!!

Wo nadi thi vapas mudi nahi
Main samandar tha aage badha nahin



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ज़नाज़ा इसलिए भारी था उस गरीब का ,.,
वो अपने साथ सारे अरमान साथ लेकर गया था ,.,!!

Janaja isliye bhari tha us gareeb ka
Wo apne saath saare armaan saath lekar gaya tha

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एक तो हुस्न बला ,उसपे बनावट तौबा ,.,
घर बिगाड़ें गे हज़ारों के ,ये संवरने वाले ,.,!!!

Ek to hushn bala , uspe banawat tauba
Ghar bigaden ge , hajaron ke , ye sanwarne wale

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ज़रा सी आहट से....वो जग जाता है रातों में..
.खुदा बेटी दे गरीब को....तो दरवाज़ा भी दे.,.,!!!

Jara si aahat se , wo jag jata hai raaton
Khuda beti de gareeb ko , to darwaja bhi de

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उम्र भर साँप से शर्मिन्दा रहे ये सुन कर,.,
जबसे इन्सान को काटा है तो फन दुखता है,.,!!!

Umra bhar saanp se sharminda rahe ye sun kar
Jabse insan ko kata hai to fan dukhta hai

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अच्छे लोगों को सब चाहा करते हैं ,.,
है कोई तलबगार बहोत बुरे हैं हम ,.,!!!

Achhe logo ko sab chaha karte hain
Hai koi talabgaar , bahot bure hain ham

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मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए,.,
वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुए,.,!!

Mai khul ke hans to raha hun fakeer hote huye
Wo muskura bhi na paya ameer hote huye

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उन घरों में जहाँ मिट्टी के घडे रहते हैं..,
कद में छोटे हों मगर लोग बङे रहते हैं..,.,!!

Un gharon me jahan mitti ke ghade rahte hai
Kad me chhote hon magar log bade rahte hain

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चाँद में बुढ़िया, बुज़ुर्गों में ख़ुदा को देखें,.,
भोले अब इतने तो ये बच्चे नहीं होते हैं,.,!!

Chand me budhiya , bujurgo me khuda ko dekhe
Bole ab itne to ye bachhe nahi hote

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वो कौन है जिन्हें तौबा की मिल गई फुरसत,
हमें गुनाह भी करने को ज़िंदगी कम है.,.!!!

Wo kaun jinhe tauba ki mil gayi fursat
Hame gunaah bhi karne ko jindagi kam hai

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-7

वो
ना ही
मिलते
तो अच्छा था...,
बेकार में मोहब्बत से
नफरत हो गयी..!!

Wo na hi milte to achha tha
Bekaar me mohabbat se nafrat ho gayi

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मुझे इस बात का ग़म नहीं की तुम
बेवफा निकले,
अफसोस तो इस बात का हैं
कि लोग सच निकले...

Mujhe is baat ka gam nahi ki tum bewafa nikale
Afsos to is baat ka hai ki log sach nikale

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वजह कोई न थी ,कदमों के लडखडाने की
आदत सी बन गयी है , गिरकर संभल जाने की !!

Vajah koi na thi , kadmon k ladkhadane ki
Aadat si ban gayi hai, gir kar sambhal jaane ki

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उस नकाब में जो चेहरा है मुझे उसे बार बार देखना है ,,,!!
 आखिर देखूँ तो सही हर बार बदल कैसे जाता है .....!!!!

Us nakab me jo chehara hai mujhe baar baar dekhna hai
Aakhir dekhu to sahi har baar badal kaise jata hai

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मै उस की आंखों को नही देखता क्योंकि रमजान मे नशा हराम है,.,!!

Mai uski aankho ko nahi dekhta kyo ki ramjaan me nasha haram hai



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ना गिनता है ........ना तोल के देता है वो जब देता है....दिल खोल के देता है,.,!!

Na ginata hai.. na tol ke deta hai wo jab deta hai .. dil khol ke deta hai

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ज़रुरत भर कर तो खुद सबको देता हैं ,.,
परेशान हैं लोग इस वास्ते , के बेपनाह मिले ,.,!!

Jarurat bhar kar to khuda sabko deta hai
Pareshan hai log is vaste ke bepanah mile

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एक सुकूँ की तलाश में न जाने कितनी बेचैनियां पाल ली ,.,
लोग कहते हैं के हम बड़े हो गए और ज़िन्दगी संभाल ली ,.,!!

Ek sukoon ki talaash me na jaane kitani bechainiya paal li
Log kahte hain ke ham bade ho gaye aur jindagi sambhal li

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ये हुश्न -ए -मौसम , ये बारिश , ये हवाएँ ,.,
लगता है आज मोहब्बत ने किसी का साथ दिया है ,.,!!!

Ye hushn-e-mausham , ye baarish, ye hawayen
Lagta hai aaj mohabbat ne kisi ka saath diya hai

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इतनी बदसलूकी ना कर...
ऐ ज़िंदगी,,हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले हैं.,.!!

Itni badsalooki na kar
Ae jindagi , ham kaun sa yahan baar baar aane waale hain

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-6

अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आंसू
अभी छेड़ी कहाँ है, दास्ताने - जिन्दगी मैंने,.,!!!

Abhi se kyon chhalak aaye tumhare aankhon me aansoo
Abhi chhedi kahan hai, daastan-e-jindagi maine

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अपना गम किस तरह से बयान करूँ,
आग लग जायेगी इस जमाने में,.,!!!

Apna gam kis tarah se bayan karu
Aag lag jaaye gi jamane me

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ख़्वाबों में भी आना तेरा अब कम
हो गया,
नफरतें तेरी शायद, ज़रा जोरों पर हैं ..!!!!

Khwabon me bhi aana tera ab kam ho gaya
Nafrate teri sayad jara joro par hai

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एक शरारा भी आशियाँ को जला देता है,.,
नादां है तू शोलों को हवा देता है,.,!!

Ek sharara bhi aashiyan ko jala deta hai
Nadan hai to sholon ko hawa deta hai

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बड़ी बारीकी से तोडा है उसने दिल का हर
कोना,
सच कहुँ मुझे तो उसके हुनर पे नाज़
होता हैं...!!!

Badi bareeki se toda hai usne dil ka har kon
Sach kahun mujhe to uske hunar pe naaj hota hai

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जनाब मत पूछिए हद हमारी सनकीपन की
हम आईन कुचल कर समझते है आसमां कुचल दिया,.,!!!

Janaab mat poochhiye had hamari sankipan ki
Ham aaina kuchal kar samajhate hai , aasman kuchal diya



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तजुर्बे ने एक बात सिखाई है...
एक नया दर्द ही...
पुराने दर्द की दवाई है...!!

Tajurbe ne ek baat sikhayi hai
Ek naya dard hi purane dard ki dawai hai

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मतलबी दुनिया के लोग खड़े है,हाथों में पत्थर लेकर ,.,
मैं कहाँ तक भागूं ,शीशे का मुकद्दर लेकर,.,!!

Matlabi duniya ke log khade hai hathon me patthar lekar
Mai kaha tak bhagun sheeshe ka mukaddar lekar

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लहू की बारिश से भीग चुका है हमारा वतन ,.,
मैं किस जुबाँ से कहूँ जश्न -ए -आज़ादी मुबारक हो ,.,!!

Lahoo ke baarish se bheeg chuka hai hamara vatan
Mai kis juban se kahun , jashn-e-aajadi mubarak ho

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आज आलम में है सन्नाटा तो है मेरी तलाश,
कल इसी दुनिया को शिकायत थी मेरी फरियाद से।

Aaj aalam me hai sannata to meri talaash
Kal isi duniya ko shikayat thi meri fariyaad se

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अगर मुझसे टूटा है पैमाना -ए -उल्फत ,.,
तुम्हारी नजर क्यों झुकी जा रही है,.,.!!!

Agar mujhse toota hai paimana-e-ulfat
Tumhari najar kyo jhuki ja rahi hai

Mehfil- Faraz (Ahmad Faraz) ke sher (Great Collection)




कौन परेशान होता है तेरे ग़म से 'फ़राज़',.,
वो अपनी ही किसी बात पे रोया होगा ,.,!!!

Kaun pareshan hota hai tere gam se 'faraz'
Vo apni hi kisi baat pe roya hoga

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किसी बेवफा की खातिर ये जूनून फ़राज़ कब तक ,.,
जो तुम्हे भुला चुका ,उसे तुम भी भूल जाओ ,.,!!

Kisi bewafa ki khatir junoon faraz kab tak
Jo tumhe bhula chuka , use tum bhi bhool jao

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वो परिंदा जिसे अपनी परवाज़ से फुर्सत न थी फ़राज़ ,.,
आज तनहा हुआ तो मेरी दीवार पे आ बैठा ,.,!!

Wo parinda jise apni parwaaj se fursat na thi 'faraz'
Aaj tanha hua to meri deewar pe aa baitha

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भूल जाना तो रश्म -ए -दुनिया है फ़राज़ ,.,
तुमने भूल कर कौन सा कमाल कर दिया ,.,.,!!!

Bhool jana to rashm-e-duniya hai faraz
Tumne bhool kar kaun sa kamaal kar diya

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सायद तू प्यासा कभी मेरी तरफ लौट आये 'फ़राज़ '…
आांखो में लिए फिरता हूँ दरिया तेरी खातिर ,.,!!!

Sayad tu pyasa kabhi meri taraf laut aaye faraz
Aankhon me liye firta hu dariya teri khatir




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ये थी मौत ,जो बिछड़ के हमने देखी है ,., फ़राज़
जिंदगी तो वोही थी जो तेरी महफ़िल में गुजर गयी ,.,.!!!

Ye thi maut , jo bichhad ke hamne dekhi hai 'faraz'
Jindagi to wohi thi jo teri mehfil me gujar gayi

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हर एक दुसरे का ऐब इस तरह निकालता है फ़राज़ ,.,
जैसे वो खुद अपनी जात में फरिस्ता हो कोई ,.,!!

Har ek dusre me aib is tarah nikalta hai faraz
Jaise wo khud apni jaat me farista ho koi

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वो जिसके पास रहता था दोस्तों का हुजूम ,.,
सुना है फ़राज़ कल रात एहसास -ए -तन्हाई से मर गया ,.,!!!

Wo jiske paas rahta tha doston ka hujoom
Suna hai faraz kal raat ehsaas-e-tanhai se mar gaya




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विदा -ए -यार का मंज़र कुछ याद नहीं फ़राज़ ,.,
बस इक डूबता सूरज नज़र में रहा ,.,!!

Vida-e-yaar ka manjar kuchh yaad nahi faraz
Bas ek doobta sooraj najar me raha

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मैंने मांगी थी उजाले की फ़क़त एक किरन 'फ़राज़',.,
तुमसे ये किसने कहा के आग लगा दी जाये ,.,!!    

Maine mangi thi ujaale ki fakat ek kiran faraz
Tumse ye kisne kaha ke aag laga di jaaye

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अजीब अँधेरा है फ़राज़ तेरी महफ़िल में ,.,
किसी ने दिल भी जलाया तो रोशनी न हुई ,.,!!

Ajeeb andhera hai faraj teri mehfil me
Kisi ne dil bhi jalaya to raushani na hui

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समंदर में फ़ना होना तो किस्मत की कहानी है फ़राज़ ,.,
जो मरता है किनारों पे ,मुझे दुःख उनपे होता है ,.,!!

Samandar me fana hona to kismat ki kahani hai faraz
Jo marta hai kinaaron pe mujhe dukh unpe hota hai

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बड़ा नाज़ था उनको अपने परदे पे फ़राज़ ,.,
कल रात वो ख्वाब में सर -ए -आम चले आये ,.,!!

Bada naaj tha unko apne parde pe faraz
Kal raat wo khwab me sar-e-aam chale aaye

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शिद्दत -ए -दर्द से शर्मिंदा नहीं मेरी वफ़ा 'फ़राज़ ',.,
दोस्त गहरे हों तो फिर जख्म भी गहरे होंगे ,.,!!!

Shiddat -e- dard se sharminda nahi meri wafa faraz
Dost gahre ho to fir jakhm bhi gahre honge

Mehfil- 2 Liners, Urdu Sher, Shayri, Kavita, Ghazal in Hindi Font Part-5

वह समझता है शराफ़त को ऊन का कुर्ता,.,
जब कड़ी धूप हो उसको उतार आता है,.,!!!

Wah samajhta hai sharafat ko oon ka kurta
Jab kadi dhoop ho usko utaar aata hai

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मालूम हमें भी है बहुत से तेरे किस्से
पर बात तेरी हमसे उछाली नहीँ जाती ,.,!!

Maalum hame bhi hai bahut se tere kisse
Par baat teri hamse uchhali nahin jaati

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छोड़ो बिखरने देते हैं जिन्दगी को
आखिर समेटने की भी हद होती है,.,!!

Chhodo bikharne dete hain jindagi ko
Aakhir sametane ki bhi had hoti hai

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फिर से हर बूँद में उसकी याद की लज़्ज़त ला कर ...
बारिशे आग लगाने का हुनर लायी हैं ... !!!

Fir se har boond me uski yaad ki lajjat lakar
Barishen aag lagane ka hunar laayi hai



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आतिश-ए-रंग-ए-हिना से मछलियां जलने लगी ,.,
तुम ने धोये जो दरिया के किनारे हाथ पाँव अपने ,.,!!!

Aatish-e-rang-e-hina se machhliyan jalne lagi
Tumne dhoye jo dariya ke kinare haath paon apne

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हमने तो नमाजे पढी है ,.,
अक्सर गंगा तेरे पानी से वजू कर कर,.,!!

Hamne to namaje padhi hai
Aksar ganga tere paani se waju kar kar

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मैखाने लाख बन्द करे जमाने वाले,
शहर में कम नहीं नजरो से पिलाने वाले...!!!

Maikhane laakh ban kre jamane wale
Shehar me kam nahi najaro se pilane wale

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वो कहने लगी, नकाब में भी पहचान लेते हो हजारों के बीच ?
मै ने मुस्करा के कहा, तेरी आँखों से ही शुरू हुआ था "इश्क", हज़ारों के बीच...!!!    

Wo kane lagi, nakab me bhi pahchan lete ho hajaron ke beech ?
Maine muskura ke kaha, teri aankho se shuru hua tha ishq hajaro ke beech

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इश्क़ पर ज़ोर नहीं ,है ये वो आतिश ग़ालिब ,.,
के लगाये न लगे ,बुझाए न बुझे ,.,!!

Ishq par jor nahi, hai ye wo aatish ghalib
Ke lagaye na lage , bujhaye na bujhe

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रहता हूँ जिस जंमीं पर वही ओढ़ लूंगा ,.,
अंजाम तक पहुँचूँ गा मैं अंजाम से पहले ,.,!!

Rahta hu jis jameen par wahi odh lunga
Anjaam tak pahuchu ga mai anjaam se pahle




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सामने बैठ के जो दिल चुराए कोई ,.,
ऐसे चोर का पता खाक लगाये कोई ,.,!!!

Saamne baith ke jo dil churaye koi
Aise chor ka pata khak lagaye koi

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होंठ मिला दिए उसने मेरे होंठो से यह कह कर.,.,
अगर शराब छोड़ दोंगे तो ये जाम रोज मिलेगा..!!!

Honth mila diye usne mere hontho se yah kah kar
Agar sharab chhod doge to ye jaam roj mile ga

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हमदर्दियाँ जनाब मुझे काटती हैं अब,.,
यूँ खामखाँ मिजाज ना पूछा करे कोई..!!!

Hamdardiyan janab mujhe kaatati hain ab
Yun khamkha mijaaj na poochha kare koi

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तेरी यादें.....कांच के टुकड़े.....!
और मेरा दिल ....नंगे पाँव...!!

Teri yaade kaanch ke tukde
Aur mera dil nange pano

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सौ बार मरना चाहा उसकी निगाहों में डूब कर,
वो निगाहें झुका लेती है हमें मरने नहीं देती..!!!

Sau baar marna chaha uski nigahon me doob kar
Wo nigahen jhuka leti hai hame marne nahi deti

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मोबाइल चलाना जिसे सिखा रहा हूँ मैं,
उसने मुझे दुनिया मे चलना सिखाया था ,.,!!

Mobile chalana jise sikha raha hun mai
Usne mujhe duniya me chalna sikhaya tha

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उसने हमारे ज़ख्मो का कुछ यूँ किया इलाज़ ।
मरहम भी लगाया तो काटों कि नोक से ,..!!!

Usne hamare jakhmo ka kuchh yun kiya ilaaj
Marham bhi lagaya to katon ki nok se

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यहाँ लिबास की कीमत है आदमी की नहीं,
मुझे गिलास बड़ा दे, शराब कम कर दे...!!!    

Yahan libaas ki keemat hai aadmi ki nahi
Mujhe gilaas bada de , sharab kam kar de

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अक्ल आई थी मशवरा देने,
इश्क़ ने मुस्कुरा के लौटा दिया..,.,!!!

Akl aayi thi mashvara dene
Ishq ne muhkara ke lauta diya

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गुज़र गया दिन अपनी तमाम रौनके लेकर ..
ज़िन्दगी ने वफ़ा की तो कल फिर सिलसिले होंगे ..!!!

Gujar gaya din apne tamam raunake lekar
Jindagi ne wafa ki to kal fir silsile honge

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सो गये बिस्तर पे वो चेहरे पे दुपट्टा डालकर,.,
मेरे कमरे की अचानक रौशनी कम हो गयी ,.,!!!

So gaye bistar pe wo chehare pe dupatta daal kar
Mere kamre ki achanak raushani kam ho gayi

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तिनका तिनका जोड़ कर बनाया था बसेरा उसने,
फिर भी कमबख्त लोग कहते है खाली है झोपड़ा उसका,.,!!  

Tinka tinka jod kar banaya tha basera usne
Fir bhi kambakht log kahte hain khaali hai jhopada uska

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सलवटें देख चेहरे पे हैरान क्यूँ हो ?
ज़िंदगी ने मुझे तुमसे कुछ ज़्यादा पहना है,.,!!!

Salwaten dekh chehare pe hairan kyu ho ?
Jindagi ne mujhe tumse jyada pahna hai

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सबके कर्जे चुका दुंगा मरने से पहले
ऐ जिंदगी बता तेरी कीमत क्या है .,.,!!!

Sabke karje chuka dunga marne se pahle
Ae jindagi bata teri keemat kya hai ?

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वजह पूछोगी तो उम्र गुजर जाएगी,
कहा ना कि..
अच्छी लगती हो तो बस अच्छी लगती हो,.,!!!

Vajah poochho gi to umra gujar jaaye gi
Kaha na ki
Achhi lagti ho to bas achhi lagti ho

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जिनसे खेलने की उम्र है उसकी..
वो उन खिलोनो को.. सड़क पर बेचता है,.,!!!

Jinse khelne ki umra hai uski
Wo un khilauno ko sadak par bechata hai

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कुछ जुर्म नहीं इश्क जो दुनिया से छुपाएं,,.,
हमने तुम्हें चाहा है, हजारों में कहेंगे.,.,!!

Kuchh jurm nahi ishq jo duniya se chhupayen
Hamne tumhe chaha hai , hajaron me kahe ge

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सनम है अगर मेरा तो मेरे नाज़ भी उठा ..!!
रुठुंगा मैं हज़ार बार तेरी गरज तू मना ..!!

Sanam hai agar mera to mere naaj bhi utha
Ruthun ga mai hajaar bar teri garaj tu mana

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मुझे अपने किरदार पे इतना तो यकिन है....
कोई मुझे छोड तो सकता है मगर भुला नही सकता.,.,!!!

Mujhe apne kirdar pe itna to yakeen hai
Koi mujhe chhod to sakta hai magar bhula nahi sakta

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उस ने उलझा दिया दुनिया में मुझे
वरना इक और क़लंदर होता,.,!!!

Usne uljha diya duniya me mujhe
Varna ek aur kalandar hota

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